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आत्मसाक्षात्कार से बडा कोई समाजकार्य नही है ।

     जैसी स्थिति परमात्मा ने मुझे दी है ,गुरुकृपा में मुझे प्राप्त हुई है ,मेरे सरीखी स्थिति प्रत्येक मनुष्य मात्र को दे ,ऐसा संकल्प उस मूर्ति के अंदर प्रवाहित किया गया है । ...

सत्य की अनुभूति

सत्य की जहाँ अनुभूति हो जाए , बस वह स्वरूप ही सत्य है। वह माध्यमरूपी शरीर जो सत्य के दर्शन करा सका , वही सत्य इसलिए भी है क्योंकि उस शरीर में शरीर का भाव ही बाकी नहीं रहा है। शरीर...