jadeja: गुरु भी गंगा नदी के समान ही होते हैं ; उनसे जुड़ने वाले लोग अच्छे भी होते हैं और बुरे भी। अब यह अनुभव हमारे श्री मठाधीशजी को आया ही होगा। लेकिन हमें अच्छे लोगों की ही संगत करनी ...
* आत्मसाक्षात्कार...६. * ५१. जिस प्रकार एक अंडे के ऊपर दाग हो तो आवश्यक नहीं कि बच्चे के ऊपर दाग रहेगा। आत्मसाक्षात्कार के पहले कोई गलती करता है तो क्षमा किया जा सकता है क्योंकि ...
* सर्वधर्म समभाव * सर्वधर्म समभाव के ऊपर मैं कार्यरत था और कार्य करते -करते , करते -करते जैसे वो शिर्डी के सांईबाबा के क्षेत्र में आ गया , उनकी प्रॉपर्टी [...
Dharmesh Patel: 🌏 जीवंत मूर्तियाँ 🌏 "वे जीवंत मूर्तियाँ स्वयं बोल उठेंगी, वे मनुष्य के प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देंगी, प्रत्येक समस्या का समाधान देंगी अशांत मन को 'शांति' देंगी, भ...
@$wiπi .: *॥जय बाबा स्वामी॥* हम दान को दो प्रकार से समझ सकते हैं- सहायता का दान , आत्मसंतोष के लिए दान करना। दान करने से हमारा आशय , जो हमारे पास है , उस में से कुछ दुसरे को स्वेच्छा से देन...
वैचारिक प्रदुषण की बीमारी गुप्त हे । लेकिन यह वैचारिक प्रदुषण से होनेवाली हानि छुपी हिई हे । इसलिए इस और ध्यान ही नहीं दिया गया हे । लेकिन एक समय एइसा आएगा जब वैचारिक प्रदुष...
Aneri: *॥जय बाबा स्वामी॥* शरीर नाशवान है। नाशवान पर चित्त रखकर शाश्वत नही पाया जा सकता है। सद्गुरु के शरीर पर चित्त रखकर हम हमारी ही आध्यात्मिक प्रगति को रोक रहे हैं। दुसरा , जिन ह...