(१) 'तन' का समर्पण* ■ प्रथम समर्पण *'तन'* का होना चाहिए। ••● *'तन' के समर्पण से मेरा आशय है जो भी शरीर को सुविधाएँ प्राप्त हो रही हैं , उसमें खुश रहो। सभी स्थानों पर गुरुसान्निध्य का अन...
गुरुदेव आपने सिंगापुर के एक प्रवचन में कहा था के अपने पास के ५ व्यक्ति को देखो । जैसे वह हे वैसे तुम हो । और अगर कोई नकारात्मक या डिप्रेसड हे तो उनसे दूर रहे । चाहे वह हमारे कित...
••● आज के युवा वर्ग पर ही बढ़ते हुए 'बुद्धि का विकास' का प्रभाव पड़ रहा है। बिना भाव के विकास तो केवल बुद्धि का विकास होगा। ••● यह तो बिना नींव के बने बिल्डिंग जैसा होगा। या समझ ...
अब कई बार कई युवकोंं के मन में , कई युवतियों के मन में प्रश्न आता होगा -- क्या स्वामीजी मोक्ष, मोक्ष करते रहते है? लेकिन वास्तव में आप देखो ना , अगर मोक्ष का लक्ष्य लेकर के आप जीवन य...
••● अभी हाल के प्रचारक-शिविर में जो प्रचारक आए थे , उन्होंने सिर्फ आत्मिक उन्नति माँगी , बस और कुछ नहीं। ••● उन्होंने इसमें सबकुछ माँग लिया। क्योंकि यही एक उन्नति है जो गुरु ...
हर साल अपना निरीक्षण करो की मेरे आत्मा का क्या प्रोग्रेस हुआ है । और धीरे धीरे सब एटेचमेंट कम करो । ध्यान में कितनी भी अच्छी स्थिति मिली हो तो वो स्थाई नही हैं । आस पास के वि...
प्रचार अपने भीतर से, जैसे सूरज की किरण निकलती है ना, वैसे अपने भीतर से प्रचार निकलना चाहिए। किसी से भी मिलो, आप बस वह बोर हो जाए ऐसा प्रचार मत करना। नहीं तो वह बोलेंगे कि सूरज का ...