सजीव अनुभूति

निर्जीव पुस्तके अनुभुति नही करा सकती सजीव अनुभूति के हमे सजीव माध्यम की आवश्यकता होगी आप कितने पुण्यवान है की  गुरुशकतीयोने आपको अनुभूति कराने के लिये आपके पास माध्यम भेजा है ।

~सद्गुरु श्री शिवकृपानंद स्वामीजी, 
गुरुपूर्णिमा 2011,  
कच्छ समर्पण आश्रम पुनडी, 
प्रवचन अंश l

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