सूर्य भगवान को अर्ध्य

*अब सूर्योदय भी हो गया था।* *मैंने अपने दोनों हाथों से पानी लेकर सूर्य भगवान को अर्ध्य  दिया। मेरे गुरु ने कहा था,"जब भी तुझे मेरी याद आए,तब मेरी याद में तू ऐसा किया कर।* *ऐसा करने से तू महसूस करेगा कि मैं तेरे साथ में ही हूँ। उगते हुए सूरज के दर्शन किया कर। प्रत्येक सूर्योदय के समय मैं तुझसे मिलने के लिए ही आता हूँ,ऐसा भाव रखा कर।*"
*उस दिन भी मैंने उन्हें याद कर ऐसा ही भाव रखा जिससे सचमुच लगा कि उस स्थान पर मैं अकेला नहीं था, मेरे साथ मेरे गुरु थे। मेरे गुरु मेरे भगवान थे, मेरे लिए तो वे सर्वस्व थे।*

    *~बाबास्वामी ...✍*

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