मनुष्य-जीवन का सारा रहस्य

यह देने की क्षमता ही हमको विकसित करती है।प्रत्येक साधक को अपने-आपको परमात्मारूपी वृक्ष की एक छोटी-सी टहनी समझना चाहिए और परमात्मारूपी वृक्ष से जो भी मिलता है, उसे बाँटना चाहिए। बाँटना ही सही अर्थ में साधक का जीवन हैं। जो बाँट रहा है, वही सही अर्थ में जुड़ा हुआ है और जो जुड़ा हुआ है, वही सही अर्थ में जीवित हैं।मनुष्य-जीवन का सारा रहस्य इस 'बाँटने' मे छुपा हुआ है।
  
हि. का. स. यो.👉(1)पेज 34👉004

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