किसी भी गुरु का शिष्य हो जाना ही एक बहुत बड़ी घटना है ।

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        किसी  भी  गुरु  का  शिष्य  हो  जाना  ही  एक  बहुत  बड़ी  घटना  है । किसी  गुरु  का  शिष्य  हो  जाना  यानी  साथ  हो  जाना । गुरु  के  साथ  संगत  करना  बड़े  सौभाग्य  की  बात  है । पुराने  समय  में  गुरु  के  साथ  तीर्थक्षेत्र  पर  जाने  का  बड़ा  महत्व  होता  था । क्योकि  गुरु  उस  तीर्थक्षेत्र  का  चैतन्य  ग्रहण  करेगा , हमारे  संगत  करने  पर  हमे  अनायास  ही  प्राप्त  हो  जाएगा । गुरु  के  केवल  साथ  रहना , पर  केवल  शिष्य  बनकर । अपने  आत्मदीपक  अखंड  जलाकर  यानी  संपूर्ण  समर्पण  कर  शुद्ध  चित्त  रूपी  दीपक  जलाकर  रहना  आवश्यक  है.
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परम पूज्य गुरुदेव
[ आध्यात्मिक सत्य ]
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