समर्पण ध्यान दो शब्दो से बना है ।
"समर्पण ध्यान दो शब्दो से बना है । और इन्हीँ दो शब्दोँ से बना है संतुलन । इसमेँ से हम एक को भी नहीँ छोड़ सकते हैँ । इन दोनोँ से हमारा नियंत्रण हमारी ईड़ा और पिँगला , दोनोँ नाड़ियो पर हो जाता है और हम मध्यनाड़ी मेँ आ जाते है ।
श्री गौतम बुद्ध ने भी इसी मध्यमार्ग की बात कही है । मध्य मेँ रहो । मध्यमार्ग मोक्ष का मार्ग है ।
इसमेँ सदगुरु की भूमिका एक पथप्रदर्शक की रहती है । वह सारे रास्ते से वाकिफ रहता है । सारे मार्ग की उसे जानकारी होती है । उसके साथ रहने से हमे रास्ते खोजना नहीँ पडता ।
अन्यथा सारा जीवन ही रास्ता खोजने मेँ चला जाता है । और जीवन के अंत मे जब रास्ता मिलता भी है तो जीवन मेँ उम्र बाकी नहीँ रहती साधना करने के लिए ।
सद्गुरु बना-बनाया मार्ग है , जिस पर लाखोँ पथिक अपनाकर चल रहे हैँ ।"
H.H.Shivkrupanand Swami,
From-Spiritual Truth.
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