गुरुमंत्र के द्वारा ही सूक्ष्म स्वरूप में सारी ईश्वरीय अनूभूतिया आपमे प्रवाहित की गई है ।

॥ॐ श्री शिवकृपानंद स्वामी नमो नमः ॥
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गुरुमंत्र  के  द्वारा  ही  सूक्ष्म  स्वरूप  में  सारी  ईश्वरीय  अनूभूतिया  आपमे  प्रवाहित  की  गई  है । और  जैसे  ही  आप  आपके  भीतर  की  अनुभूति  को  प्राप्त  करेंगे , अनुभूतिया  अनुभव  करेंगे , तो  आप  महसूस  करेंगे , अनुभूति  के  साथ  साथ  आपको  गुरुमंत्र  भी  आपके  भीतर  से  सुनाई  आना  शुरू  हो  जाएगा । उसी  गुरुमंत्र  की  आभा , उसी  गुरुमंत्र  का  प्रकाश , उसी  गुरुमंत्र  का  स्पंदन  आपको  चैतन्य  के  रूप  से  आपके  भीतर  से  ही  होना  प्रारंभ  हो  जाता  है । ये  भी  एक  अलग  अनुभूति  है ।
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-परम पूज्य गुरुदेव    


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