ऐसे परमात्मामय शरीर का सान्निध्य तो छोडो
ऐसे परमात्मामय शरीर का सान्निध्य तो छोडो, शरीर का दर्शन भी किसी को मिल जाए तो उस दर्शनमात्र से भी आत्मा इतनी ऊर्जा पाती है कि वह मोक्ष का मार्ग पता लगा सके। एक दर्शन से भी घटना घटित हो जाती है। ऐसे परमात्मामय शरीर के दर्शन केवल पुण्यात्माएँ ही कर सकती है। उनके सामने केवल पुण्यात्माएँ ही आ सकती है। इसीलिए गुरु को सदैव अनुभव करना चाहिए। हि. स. यो. १/ ४५१
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