शिष्य की गुरु से आत्मीयता होनी चाहिए।

शिष्य की गुरु से आत्मीयता होनी चाहिए। आत्मियता होगी श्रद्धा से। जब तक श्रद्धा नहि होगी, तब तक आत्मीयता नहि होगी और जब तक आत्मीयता नहि होगी, श्रद्धा  नहि आएगी। यह सब एक दूसरे से जुडा होता है। आत्मीयता होने पर ही ग़ुरू की बात उसी अर्थ में समजी जा सकती है, जिस अर्थ में गुरु बोल रहे है। *_

HSY 1 pg 85

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