भाव ही है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है

_*यह भाव ही है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है। शरीर को प्राप्त करने की अपनी सीमा है। उस से अधिक वह प्राप्त कर ही नहि सकता है। पर आत्मा की कोई सीमा नहि है। वह किसी भी सीमा के पार जाकर प्राप्त कर सकता है। भाव आत्मा की गुणग्राहकता बढ़ाता है। भाव ही आत्मा की ग्रहण करने की क्षमता को बढ़ाता है। *_
_* जय बाबा स्वामी*_

_*HSY 2 pg 320*_

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