मूर्ति पूजा प्राईमरी है।


मूर्ति पूजा प्राईमरी है। तो क्या हमें जीवन भर प्राईमरी में ही बैठे रहना है? हमें प्रगति भी करना है।

सन्त ज्ञानेश्वर जी ने इस शरीर को ही मन्दिर कहा है। और तालु भाग इसका प्रवेश द्वार है। वास्तव में चित्त को भीतर ले जाने पर ही  प्रगति संभव है।

~परम पूजनीय सद्गुरु श्री शिवकृपानंद, स्वामीजी
शिर्डी महाशिविर 2018, पांचवा दिन

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