वन में पाना चाहते हो , वही आप दूसरों को देना प्रारंभ करें

आपकी आर्थिक स्थिति खराब है और आप चाहते हो कि आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी हो , तो आप लोगों को आर्थिक सहायता करना प्रारंभ करें। लेकिन ध्यान रहे , इसका प्रदर्शन न हो। अन्यथा और आपकी परिस्थिति खरब हो जाएगी। यानी आप जो भी जीवन में पाना चाहते हो , वही आप दूसरों को देना प्रारंभ करें और यह करने की क्रिया आत्मा से ही होनी चाहिए , शरीर से नहीं।  अन्यथा वह शरीर का अहंकार ही बठ़ाएगी। नाभि चक्र खुल जाने के बाद आपको आपके नाभि के ऊपर एक प्रकार के स्पंदन का अनुभब होगा। यह नाभि चक्र विकसित होने की पहचान है। मनुष्य को समाधान प्राप्त किए बिना आध्यात्मिक प्रगति नहीं  हो सकती है। इसलिए कहते हैं कि नाभि चक्र पर भवसागर होता है और वह बिना गुरु के पार नहीं किया जा सकता है। गुरु यानी सामुहिकता का दूसरा नाम है । गुरु कभी भी अकेला नहीं होता है , सदैव अच्छे , पवित्र आत्माओं की सामुहिकता उसके साथ होती ही है।

भाग -६ -२१६/२१७

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