मृगजल
मनुष्य के जिवन मे बाते मृगजल के समान होती है । इन दो बातो को मनुष्य जिवन भर खोजते ही रहता है। और मनुष्य का जिवन समाप्त हो जाता है। फीर भी वह पा नही पाता है। यह दो बाते मृगजल के समान उसे बाहर दुर दिखती है । पर वह केवल और केवल भ्रम होता है।की मैने बस अब पा ही लीया है।लेकीन पाता नही है। यह दो बाते है एक है । “ सुख” और दुसरा है “परमात्मा” मनुष्य अपने जिवन भर इसे बाहर ही खोजते रहता है। जब की यह दोनो ही उसके भितर ही सुप्त रूप मे सदैव वीद्यमान होती है लेकीन वह भितर को छोडकर बाहर ही देखते रहता है।और जिवन के अंत मे ही यह बात समझ मे आती है।
आप सभी को यह “ सत्य” आपके जिवन काल मे ही समझ मे आ जाय यही परमात्मा से प्राथेना है। आप सभी को खुब खुब आशिेवाद
आपका अपना
बाबा स्वामी
२१/१०/२०१७
Comments
Post a Comment