विश्वामित्र और मेनका

बचपन में विश्वामित्र और मेनका की जो कहानी मैंने मेरी नानी के मुख से सुनी थी,क्या वह सत्य घटना थी कि वह भी केवल कहानी ही रही होगी?विश्वामित्र मुनि इंद्रपद चाहते थे,इसलिए वे ध्यानसाधना करने लगे और उनकी तपस्या भंग करने  के लिए स्वर्ग से इंद्र ने मेनका अप्सरा को भेजा। और उसने श्री विश्वामित्र मुनि के सामने नाचकर उनका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और उनको अपने मोह् पाश में बाँध कर उनकी तपस्या भंग की। यह कहानी मैंने सुनी थी।क्या स्त्रियाँ इतनी बुरी होती हैं?लेकिन सभी पुरुषों को जन्म देने वाली स्त्रियाँ ही तो हैं!अगर स्त्रियाँ न होतीं तो पुरुष जन्म ही कैसे ले सकते थे?ये सब विरोधाभासी लग रहे थे। मैंने सोचा--पुरुष जैसे सबकुछ छोड़कर  चाहे जहाँ वहाँभाग सकता है,वैसे शायद कोई स्त्री सब छोड़कर भाग नहीं सकती। शहरों  से भी लड़के भागकर  आते हैं लेकिन कोई लड़की कभी भागकर नहीं आती है। ऐसा क्यों होता होगा?क्या लड़की की भागने की कभी इच्छा नहीं होती होगी या  वह भाग नहीं पाती होगी?पता नहीं क्यों ,ऐसा लगा कि प्रत्येक पुरुष में स्त्री के प्रति एक सुप्त आकर्षण होता है और वह वास्तव में उसकी कमजोरी है। और अपनी इस कमजोरी को छिपाने के लिए  वह स्त्री को दोष देता है--स्त्रियाँ बुरी होती हैं,स्त्रियों के पास आने से ध्यानसाधना नहीं हो सकती,वे ध्यानसाधना में विघ्न डालती हैं। लेकिन क्या वास्तव में वे विघ्न डालती हैं या पुरुषों  ने ही ऐसा कहकर एक वातावरण बना दिया है?या पुरुष प्रधान संस्कृति होने के कारण, ' मोक्ष ' पाना केवल पुरुषों का अधिकार है,ऐसा माना गया हो और ध्यान करना भी पुरुषों  का एकाधिकार  बना हुआ हो?...

हि.स.यो-४                  
पु-३५९

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