गुरुलोक से बड़े गौर से गुरुशक्तियाँ देखती रहती हैं
इतने विशाल विश्व में एक मनुष्य का क्या अस्तित्व है ? कुछ भी तो नहीं
एक छोटे से , नन्हे से शरीर को ही पकड़कर सारा जीवन मनुष्य गवां देता है | गुरुलोक से बड़े गौर से गुरुशक्तियाँ देखती रहती हैं - कौन ध्यान कर रहा है, किसका कितना ध्यान लग रहा है ?
मनुष्य को केवल दो ही कार्य करने चाहिए - एक तो अच्छे कार्य करने की इच्छा करना ,दूसरा ध्यान कर अपने अस्तित्व को ब्रह्माण्ड में विलीन करना | इस करने की प्रक्रिया में मनुष्य का अहंकार सबसे आखिर में विलीन होता है |
हि.स.यो.१/३६६
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