मानव योनि
मानव योनि एक चक्र ही है । आत्मा उस योनि के चक्कर में ही अटक जाती है । मानव योनि में आत्मा की उत्क्रांति भी क्रमबद्ध तरीके से , थोड़ी -थोड़ी ही हो सकती है क्योंकि मानव योनि में अतिबूद्धि का साथ आत्मा को मिलता है और फ़िर बुद्धि आई तो विचार भी आए और मानव योनि मे आत्मा धीरे -धीरे विकसित होती है ।
ही .का .स .योग .
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