भूमिमाता
" तुम सोचो - तुम तुम्हारी माँ की गोद में ही बैठे हो | वैसी ही निश्र्चिंतता से , अपनेपन से धरती के ऊपर बैठो और पूर्ण समर्पित होकर आप धरती से प्रार्थना करो कि मैं आपकी ओर संपूर्णसमर्पित हूँ , मेरे चित को शुध्ध व सशक्त करने की कृपा करें | तुम महसूस करोगे - तुम्हारे भीतर की खराब ऊर्जा के स्पंदन होना चालू हो गए और तुम्हारे चित सशक्त व शुध्ध हो जाएगा | भूमिमाता में गुरुत्वाकर्षण शक्ति होती है | जब हम प्रार्थना के ध्वारा उस गुरुत्वाकर्षण शक्ति के साथ समरसता स्थापित करते हैं , तो हमारे चित की शुध्धि हो जाती है | भूमिमाता चितशुध्धि करने में बड़ी सहायक होती हैं | जब चित सशक्त हो जाता है, तो शरीर भी स्वस्थ हो जाता है ..........
हि.स.यो-१ पृ-४२
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