सुख और दुःख

सुख और दुःख दोनो शरीर से संबंधित हे और ध्यान उसके ऊपर की स्थिति है। ध्यान में न तो सुख का अनुभव है और न ही दुःख का अनुभव है।

बाबा स्वामी
HSY 6 pg 155

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