आत्मसाक्षात्कार ग्रहण करो और आत्मसाधना करना प्रारंभ करो

दुनिया का कोई भी हाइवे किसी के भी घर तक नहीं जाता है क्योंकि हाइवे पर का किसी का घर नहीं होता है | फिर हाइवे से घर तक का सफर हमें छोटी-छोटी गलियों  और छोटे-छोटे रास्तों से ही पूर्ण करना पड़ता है | ठीक वैसा ही प्रत्येक मनुष्य को अपना अंतिम सफर अपनी आत्मा के साथ🤝🏻ही पूर्ण करना होता है | आपके जीवन के अंतिम क्षणों में आपके साथ केवल आपका आत्मा ही होता है | इसलिए केवल "सतगुरु" को ही चिपके मत रहो | आप "आत्मसाक्षात्कार"  ग्रहण करो और "आत्मसाधना" करना प्रारंभ करो |
  
बाबा स्वामी
पवित्र आत्मा 104

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