सहस्त्रार चक्र

हमने तो केवल रुप को मान्यता दी है रुप माध्यम है लेकिन आज्ञाचक्र के प्रकाश के स्थान से निकलकर जब आप इस सहस्त्रार चक्र पर आते हैं तो दिखने की सारी प्रक्रिया ही बंद हो जाती है। और इस चक्र पर आने पर साघक को अनुभूतियाँ होना प्रारंभ हो जाता है। आप को कभी गुलाब की खुशबू आना प्रारंभ हो जाता है तो कभी एकदम ही चंदन की खुशबू आना प्रारंभ हो जाता है। आप के आसपास सभी और चंदन ही चंदन की खुशबू आने लग जाती है या आप को घँटनाद दूर कहीं हो रहा है ऎसा सुनाई आने लग जाता है या शंखनाद कहीं हो रहा है ऎसा सुनाई आना प्रारंभ हो जाता है। इस प्रकार की अनुभूतियाँ होना प्रारंभ हो जाता है।

हि स यो भा ६
पा २६२

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