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"' हमे अच्छा लगा "' यह अनुभूति तो विश्व का प्रत्तेक मनुष्य अनुभव कर सकता है और यह अनुभव करने के लिए किसी भाषा की आवश्यकता नही है , यह अनुभव बिना भाषा के भी हो सकता है , जिस व्यक्ति को बोलना भी नही आता वह व्यक्ति भी कर सकता है क्योंकि अनुभव करना प्रत्येक मनुष्य को आता है । इसलिए समूचे विश्व मे सारे मनुष्यों से संबंध केवल अनुभूति के माध्यम से ही हो सकते है । यह ठीक वैसा ही है , जैसे प्रसन्नता के साथ किसी का भी स्वागत करना किसी भी मनुष्य को प्रसन्न करेगा । कहने का अर्थ है की आपका विश्व के प्रत्तेक मनुष्य के साथ जुड़ने का माध्यम अनुभूति पर आधारित ही होना चाहिए ।.....
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ही..का..स.योग...
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🙏।।जय बाबा स्वामी ।।🙏 ***********🦋🕉🦋*
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