हम हमारे भीतर का आत्माभाव बठाते हैं तो इन सुख और दुःख की स्थिति से ऊपर निकला जा सकता है।

तो ये बच्चे बचपन मे अपने जीवन में अतृप्त थे ही। और ऐसे ही अतृप्त लोगों में अधिक अतृप्त निर्माण करके युवकों को उग्र विचारधारा के लोग अपने लिए तैयार करते हैं। यानी अतृप्त सालों तक बनी हुई हो तो उस स्थिति में से निकलने में भी समय लगता है। और इसीलिए अगर हम हमारे भीतर का आत्माभाव बठाते हैं तो इन सुख और दुःख की स्थिति से ऊपर निकला जा सकता है। उसके बाद में सबेरे वापस आश्रम में आ गया। शाम को फिर सब माँ लोग मिलने आए थे। मैंने उन्हें बताया। मेरी उनकी भेंट हुई , काफी देर तक चर्चा हुई लेकिन वे ध्यान का शिबिर करने को तैयार ही नहीं हैं। मुझे कोई वशीकरण मंत्र थोड़े ही आता है कि मैं उन्हें अपने वश में कर लूँगा , या न तो मैं खूब अच्छा वक्ता हूँ कि में उन्हें प्रभावित कर सकूँ। और वे संख्या में भी काफी थे। मैं क्या कर सकता हूँ ? जी भी कर सकता था वह किया और वे अभी समूह में हैं। जब वे अकेले होंगे तब हो सकता है मेरी बात ही उन्हें उचित लगे। आप अपना ध्यान चालू रखो और उनके लिए प्रार्थना करो , यही एक मात्र मार्ग मुझे ठीक लग रहा है।

भाग - ६ -१५६
दि:- ११-९-१७

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