नाभि चक्र

मैं नदी में स्नान करते समय नाभि चक्र पर चित्त रखकर ध्यान करता हूँ। ... ध्यान करते समय मन में यह भावना करनी होती है कि सद्गुरु की कृपा में मेरा नाभिचक्र क्रियान्वित हो रहा है। और अपनी नाभि पर अपने दाहिने हाथ के पंजे का मध्यभाग रखकर गोल-गोल, क्लोकवाईज घुमाकर यह भावना करनी होती है कि नाभि चक्र एक सही गति में घूम रहा है और उसके कारण मेरे शरीर में जो भी खराब ऊर्जा आई है, जो शरीर में खाने के कारण आई हो या विचारों के कारण आई हो या गलत जगह पर चित्त जाने से आई हो, सब बुरी ऊर्जा बाहर निकल रही है और मेरा नाभि चक्र शुद्ध और पवित्र हो रहा है, दोषरहित हो रहा है। 

हि.स.यो. ४/११३

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