आध्यात्मिक शक्तियाँ स्वयं ही प्राप्त हो जाती है;

_* आध्यात्मिक शक्तियाँ स्वयं ही प्राप्त हो जाती है; इन्हें कोई दे नहि सकता , कोई इन्हें ले नहि सकता। ये तो केवल सान्निध्य मात्र से ही प्राप्त हो जाती है। ये बड़ी सूक्ष्म होती है। ये देखी नहि जा सकती है, केवल अनुभव की जा सकती है। इनको देने वाला व इनको पाने वाला , दोनो ही इन्हें अनुभव करते है और इस अनुभव से वे ही दोनो प्रसन्न होते है। *_
_* जय बाबा स्वामी*_
☘🌹🙏🏻🌹☘
_* HSY 2 pg 253*_

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