मेरे जीवन में दो ही "श्रद्धास्थान " है ।


मेरे   जीवन   में   दो   ही   "श्रद्धास्थान "  है । एक   इस   वटवृक्ष   का   बीज   श्री   शिवबाबा   और   दुसरा   उस   बीज   को   वटवृक्ष   बनानेवाला   माली   मेरी   पत्नी   जिसकी   देखभाल   के   बिना   वह   बीज   अंकुरित   भी   होना   संभव   नही   था ।...
-बाबा स्वामी 
श्री   शिवबाबा
गुरुमाँ

Comments

Popular posts from this blog

Subtle Body (Sukshma Sharir) of Sadguru Shree Shivkrupanand Swami

Shivkrupanand Swami