प्रत्तेक आत्मा मोक्ष की कामना लेकर इस धरती पर जन्म लेती है
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🌹फुलोँ की खुशबू से 🌹
प्रत्तेक आत्मा मोक्ष की कामना लेकर इस धरती पर जन्म लेती है किंतु संसार का मायाजाल उसे भ्रमित कर देता है । जग की भूलभूलैया में भटकते -भटकते अचानक उसे अपना जिवणधेय अर्थात मोक्ष की याद आती है । तब उसी क्षण से आत्मा गुरु को मिलने से आतुर हो उठती है । जब -तक उसे गुरु नही मिलता आत्मा की स्थिति जल बिन -मछली -सी हो जाती है । तब जीवन में गुरु का प्रवेश होता है । गुरु आत्मज्ञानी होता है । उसकी कृपा में साधक को भी आत्मज्ञान प्राप्त होता है । सदगुरु साधक को पारिवारिक जिम्मेदारियाँ निभाते हुए ध्यान करने की प्रेरणा देता है ।...
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आदिशक्ती " गुरुमाँ "
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🙏जय बाबा स्वामी 🙏
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