।। सुनहरी याँदे ।।


घर के पास ही एक पहाड़ी नदी थी । प्रायः शाम को वहाँ पर हम सभी घूमने को जाते थे । यह हमारे नियमित घूमने -फीरने का एक स्थान था । मै और मेरी पत्नी बातचीत करते और ये सभी बच्चे रेत में खेलते थे । यह समय ही हमारे फुरसत का समय होता था ।
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परम पूज्य गुरुदेव
ही .का .स .योग
भाग :- ५ पृष्ठ ६४

🙏।।जय बाबा स्वामी ।।

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