आत्मा को सशक्त करने के पूर्व मनुष्य को यह जानना होगा कि मैं एक आत्मा हूँ, मैं शरीर नहि हूँ।
_*आत्मा को सशक्त करने के पूर्व मनुष्य को यह जानना होगा कि मैं एक आत्मा हूँ, मैं शरीर नहि हूँ। एसा पहला विचार ही मनुष्य के शरीर से आत्मा को अलग अस्तित्व प्रदान करता है और फिर वह यह भाव निर्माण करने में सफल होगा की मैं एक आत्मा हूँ। उतना ही उसका आत्मा सशक्त होना प्रारम्भ हो जाएगा। धीरे धीरे मनुष्य अपने आत्मा के क़रीब जाना प्रारम्भ करेगा। यानी सारे आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत , मैं एक पवित्र आत्मा हुँ, यह जानने से ही होती है।*_
_* जय बाबा स्वामी*_
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_* HSY 2 pg 233*_
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