प्रकाश के छः पुंज
मैने फिर से अपनी बाई ओर देखा तो प्रकाश के छः पुंज दिखाई दिए जो एक निश्चित अंतर से , क्रमबद्ध तरीके से ही खड़े थे । मैने मन ही मन उन्हे नमस्कार किया जो मेरे बाएँ कंधे के ललित चक्र से जुड़े हुए थे । फिर मैने दाहिनी ओर देखा तो मेरे दाहिने कंधे के श्री चक्र से पाँच प्रकाशपुँज लाइन से जुड़े थे । वें भी एक निश्चित अंतर रखकर ही थे । मैने अंतर्मन से उन्हे भी नमस्कार किया और उसी क्षण " अधिकृत " शब्द का सारा अर्थ ही समझ में आगया । आध्यात्मिक क्षेत्र में "अधिकृत " शब्द का बड़ा महत्व है । सारा आध्यात्मिक क्षेत्र ही इस "अधिकृत " शब्द पर ही आधारित है , ऐसा अनुभव हुआ ।...
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परम पूज्य गुरु माऊली
ही .का .स .योग ...
भाग :-- ५--पृष्ठ -३८६..

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