साधक अपना भूतकाल तथा भविष्य गुरुचरनो में समर्पित कर देता है
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॥स्वामी शिवकृपानंद तेरी जय जयकार है ॥
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साधक के जीवन में जब गुरु का आगमन होता है तब साधक अपना भूतकाल तथा भविष्य गुरुचरनो में समर्पित कर देता है । साधक का समर्पण भाव उसे शुद्ध एवं पवित्र कर देता है । साधक की जीवन की सभी समस्याएँ दूर हो जाती है । बरबस ही साधक मन गुरु से प्रार्थना करता है की हे गुरूवर , मेरे चित्त में सदैव आप वीराजे । केवल आप विराजमान रहे ।..
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*वंदनिय पूज्या गुरुमाँ *
🙏जय हो माँ 🙏
🙏जय बाबा स्वामी 🙏
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