आध्यात्मिक क्षेत्र में शारीरिक प्रयत्नो का कोई स्थान नहीं होता है

*आध्यात्मिक क्षेत्र में शारीरिक प्रयत्नो का कोई स्थान नहीं होता है, सबकुछ मनुष्य की पात्रता पर ही निर्भर करता है। मनुष्य अपने ह्रदय को जितना अधिक विशाल रखेगा, जितने बड़े दायरे में सोचेगा, उस मनुष्य को ठीक उतना ही बड़ा अवसर जीवन में प्राप्त होगा। इसीलिए सदैव हमारी सोच पवित्र व शुद्ध रखनी चाहिए। हमारा चित्त भी उतना ही विकसित होता है। *_

_* HSY 1 pg 241

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