मनुष्य योनि ही ऐसी योनि हे जिससे नर से नारायण तक की यात्रा की जा सकती है।

 प्रत्येक मनुष्य गुरु बन सकता है। मनुष्य योनि ही ऐसी योनि हे जिससे नर से नारायण तक की यात्रा की जा सकती है। यह मानवजन्म ही वह जन्म हे जो जन्म लेकर कोई भी आत्मा गुरु बन सकती हे। कोई भी मनुष्य अपने आपको रिक्त कर सकता है; कोई भी यानी कोई भी। सभी मनुष्यों के किए समान अवसर प्राप्त है, निहशुल्क प्राप्त हे। परमात्मा की यह विशेषता होती है- वह सबको समान रूप से देता है। इसमें जाती का, धर्म जा, देश का कोई भेदभाव नहीं होता है। और परमात्मा निहशुल्क प्रदान करता हे क्यूँकि परमात्मा के राज्य में व्यवहार को कोई जगह नहीं हे। 

-HSY 1 pg 194-195

Comments

Popular posts from this blog

Subtle Body (Sukshma Sharir) of Sadguru Shree Shivkrupanand Swami

Shivkrupanand Swami