प्रत्येक मनुष्य अपने आपको आत्मा समझेगा तो इस जगत् की समस्याएँ ही समाप्त हो जाएँगी

अब आप कल्पना करो ऐसे जगत् की जहाँ प्रत्येक मनुष्य अपने आपको आत्मा समझेगा तो इस जगत् की समस्याएँ ही समाप्त हो जाएँगी | सद्गुरु सदैव आत्मस्वरूप की स्थिति में रहते हैं | उनके जैसी स्थिति हमें भी पानी होगी तो हमें उनके साथ चित से जुड़ना होगा | आप जब अपने भीतर जाने का प्रयास करेंगे तो जानेंगे - यह आवरण तो बाद में ओढ़ा हुआ है; " *मेरा स्वरूप तो एक केवल आत्मा का है* " | और आप आपकी आत्मा में अधनारीनटेश्वर को ही पाएँगे ..... हि.स.यो-४| पृष्ठ-१३५

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