मनुष्य के सब रिश्ते आशाश्वत होते है
*मनुष्य के सब रिश्ते आशाश्वत होते है। आत्मा ही एक रिश्ता शाश्वत होता है,
वह रिश्ता हे परमात्मा का। क्यूँकि परमात्मा से ही आत्मा का निर्माण हुआ
है। आत्मा के परमात्मा उसके सद्गुरू होते है जो आत्मा का निर्माण करते है।
सदगुरू आत्मा को जन्म देने वाली माँ है। यह आत्मा और सदगुरु का रिश्ता
जन्मो जन्मो का रिश्ता होता है। यह रिश्ता शाश्वत है क्यूँकि सदगुरु के
बिना आत्मा का जन्म ही सम्भव नहीं हे। *_
_*jay baba swami*_
_*HSY 1 pg 216*_
_*jay baba swami*_
_*HSY 1 pg 216*_
Comments
Post a Comment