आत्मलोक

 ●एक पवित्र आत्मलोक है। सभी आत्माएँ इस धरती पर वहाँ से ही आई हैं।
●इस आत्मलोक की स्थिति एक अलग पृथ्वी जैसी ही है और सभी आत्माएँ वहाँ पर सामूहिकता में रहती हैं।
●आत्मा का परमात्मा उसका सद्दगुरू होता है जो आत्मा का निमाॅण करता है।
●सद्दगुरू आत्मा को जन्म देने वाली माँ है।
●तुम्हारा जीवन तो अश्वमेघ यज्ञ जैसा है।

*---*हिमालय का समपॅण योग,
*---*पवित्र ग्रंथ
भाग 1,
पृष्ठ - 176,177,167,162,337

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