कर्म

कोई कीसी को कभी भी सुखी नही कर सकता है। प्रत्येक व्यक्ती अपने कर्म से सुखी या दुखी होता है। भले ही वह आपका अपना बच्चा ही क्योन हो। आप अपने बच्चे को क्या सही है , क्या गलत है उतना बताने का अपना कर्तव्य करे, बस यही अापके हाथ मे है।बच्चा भी एक आत्मा है। वह भी अपने कर्म के भोग भोगने ही जन्मा है।यह सदैव याद रखो तो ही आप अपने जिवन मे मुक्त अवस्थाको प्राप्त कर सकते हो।

 बाबा स्वामी
 25/10/2017

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