आत्मानुभूति का अनुभव इस मनुष्यजीवन का सर्वश्रेष्ठ अनुभव

हम जीवन में कितना भी पढ़ें या कितना भी सुनें ,वह जब तक अनुभव नहीं होता ,तब तक वह सम्पूर्ण समझ में नहीं आता है | एक अनुभूति ही मनुष्य को सब समझा देती है |

यह ठीक ऐसा ही है की शक्कर कितनी मीठी है ,उसके ऊपर एक पुस्तक लिख दो और कोई वह पूरी पुस्तक भी पढ़ ले ,तो भी शक्कर कितनी मीठी लगती है वह जान नहीं सकता है | उससे अच्छा है कि  एक चिमटीभर शक्कर ही उसे खिला दो | वह सब जान जाएगा की शक्कर कितनी मीठी होती है | और यह अनुभूति उसे जीवनभर शक्कर की मिठास की याद कराएगी |

आत्मज्ञान का भी ऐसा ही है | कितनी ही बातें सुन लें या कितने ही ग्रन्थ पढ़ लें ,आत्मज्ञान की अनुभूति जबतक आपको नहीं होती ,तब तक इसे सम्पूर्ण समझा ही नहीं जा सकता है | यह अनुभूति भी एक विचित्र अनुभव ही है जिसमे अनुभूति पानेवाला अपनी  ही मस्ती में मस्त रहकर आनंद प्राप्ति करता रहता है |-

आत्मानुभूति का अनुभव इस मनुष्यजीवन का सर्वश्रेष्ठ अनुभव है | यह अनुभव लेने के बाद फिर कोई और अनुभव लेने का मन ही नहीं करेगा | आत्मानुभूति एक शाश्वत सुख की अनुभूति प्रदान करती है जो कभी जीवन में प्राप्त हुई ही नहीं थी | इसे तो जिसने अनुभव किया वही जान सकता है | यह अभिव्यक्त की ही नहीं जा सकती |

हि.स.यो.३/७६

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