साधकों के लिए सँदेश

साधक भी तीन प्रकार के होते है ।

[1] पहला साधक "रोगी साधक होता है ।
[2] दूसरा साधक भोगी साधक होता है ।
[3] और तीसरा साधक "योगी साधक होता है ।
      
हमे अछे योगी साधकों की संगत करना चाहिए । इसलिए "गुरुचरण"वह स्थान है,जहाँ ऐसे साधक सामूहिकता में
रहते है । . . .

परमपूज्य गुरुमाऊली
18--3--2007
रवीवार

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