जो अनुभव होता है वह परमात्मा है। जो दिखता है वह माध्यम है।*

जो अनुभव होता है वह परमात्मा है। जो दिखता है वह माध्यम है। माध्यम परमात्मा नहीं होता है पर परमात्मा माध्यम में होता है और वह उसमें से बहता है हमें चैतन्य के रूप में अनुभव होता है।

*-बाबा स्वामी-*
*हिमालय का समर्पण योग*
*पृष्ठ क्रमांक - २८६*

Comments

Popular posts from this blog

Subtle Body (Sukshma Sharir) of Sadguru Shree Shivkrupanand Swami

Shivkrupanand Swami