आत्मा जब परमात्मा को समर्पित हो जाती है, तब

"आत्मा जब परमात्मा को समर्पित हो जाती है, तब शरीर का 'कर्ता' भाव ही नहीं रहता है l मनुष्य का सारा शरीर ही आत्मा के नियंत्रण में चला जाता है l समर्पण ध्यान में ध्यान के पूर्व समर्पण को महत्व दिया गया है l यह ध्यान की वह पद्धति है जो आज के वर्तमानकाल के 'माध्यम' से प्राप्त अनुभूति पर आधारित है l इसमें आत्मा का पूर्ण 'समर्पण' परमात्मा के प्रति, उसके आज के 'माध्यम' के द्वारा किया जाता है l
हमारा समर्पण का भाव जितना बढ़ता है, यह भाव ही प्रथम शरीर की शुद्धि व् आरोग्य प्रदान कर्ता है l बाद में एक आत्मिक समाधान प्रदान कर आत्मशांति देता है l और पवित्र आत्माओं की सामूहिकता में रहने से चित्त वैसे ही शुद्ध एवं पवित्र हो जाता है l और आत्मा के भाव से 'ध्यान अवस्था' सहज ही प्राप्त हो जाती है l और ध्यान करने के लिए कोई प्रयत्न नहीं करना पड़ता है l"

~ सदगुरु श्री शिवकृपानंद स्वामीजी 

Comments

Popular posts from this blog

Subtle Body (Sukshma Sharir) of Sadguru Shree Shivkrupanand Swami

Shivkrupanand Swami