23 साल हुये

पिछले 23 साल मुझे हिमालय से समाज मे आये हुये है। इन 23 सालो लाखो लोगो को मीलना हुआ जानना हुआ।लेकीन कीसी के प्रती भी मेरे मन मे बुरा भाव नही है। क्योकी वास्तव मे हमारे शरीर मे मन का कोई. अस्तीत्व ही नही है।शरीर और आत्मा के संमन्ध से मन की नीमीेती है।अगर शरीरभाव ही नही है तो मन भी नही है। अमन वह अवस्था है।जहॉ केवल पवीत्र आत्मा रह जाता है।
इस अमन अवस्था को मशीनो से जांचा जा सकता है।ओरा के प्रगती के यह फोटो इसके प्रमाण है।ऐसा नही की इन सालो मे बुरे लोग मीले ही न होगे या जिवन मे कोई समस्या आयी ही नही होगी पर केवल उसे साक्षी भाव से देखा है।और सभी को नीव्याज प्रेम कीया है।और केवल 30 मीनीट नीयमीत ध्यान कीया है। बस इतना ही किया है।और समाज मे ही रह कर मुझे यह अवस्था प्राप्त हो सकती है। तो आप सभी को क्यो नही हो सकती मुझे सदैव आपके प्रती यह “भाव” रहता है। की जो भी मुझे मीले वह प्रत्येक मनुष्य को मीले।आप सभी को प्रेरणा मीले यही प्राथेना है।

आपका अपना
बाबा स्वामी

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