श्री विनोबाजी के मैत्री आश्रम
आसाम में ही चीन सीमा की ओर एक स्थान पर मुझे श्री विनोबाजी के मैत्री आश्रम में ध्यान का शिबिर लगाने के लिए बुलाया तो वहाँ जब मैं पहुँचा तो वह आश्रम एकदम छोटे-से गाँव में स्थित था।
भाग - ६ १४१
रोड के किनारे पर आश्रम का एक छोटा-सा बोर्ड था। इस छोटे-से बोर्ड से कोई अंदाज भी नहीं लगा सकता था कि इतना बड़ा आश्रम होगा। उनके अपने बहुत से खेत थे। वह इतने दूर-दूर थे कि मेरा लड़का जो सुबह जाता था , वह शाम को ही आता था। वे बोलीं , हमारा उद्देश स्त्रियों को स्वावलबी बनाना है। यहाँ पर सब कार्य सबको आता है। सब बारी-बारी से सब कार्य करते हैं। सब मिल-जुलकर रहते थे। प्रायः सभी ने ही अपना घर छोड़ दिया है। अब यह आश्रम ही उनका घर है। और यही सब लोग उनका पारिवार है। रोज नियमित प्रार्थना और भजन आदि उनके भी कार्यक्रम होते थे। मैं भी नियमित उसमें भी भाग लेता था। प्रायः नाश्ते और भोजन के समय भी सब एकत्र होते थे। सब लोग बड़े शांत स्वभाव के थे। यहाँ कोसी को कोई समस्या नहीं थी, किसी ने कोई समस्या की बाते नहीं की। आपस में भी सभी के बड़े आत्मीय संबंध थे
भाग - ६ १४१
रोड के किनारे पर आश्रम का एक छोटा-सा बोर्ड था। इस छोटे-से बोर्ड से कोई अंदाज भी नहीं लगा सकता था कि इतना बड़ा आश्रम होगा। उनके अपने बहुत से खेत थे। वह इतने दूर-दूर थे कि मेरा लड़का जो सुबह जाता था , वह शाम को ही आता था। वे बोलीं , हमारा उद्देश स्त्रियों को स्वावलबी बनाना है। यहाँ पर सब कार्य सबको आता है। सब बारी-बारी से सब कार्य करते हैं। सब मिल-जुलकर रहते थे। प्रायः सभी ने ही अपना घर छोड़ दिया है। अब यह आश्रम ही उनका घर है। और यही सब लोग उनका पारिवार है। रोज नियमित प्रार्थना और भजन आदि उनके भी कार्यक्रम होते थे। मैं भी नियमित उसमें भी भाग लेता था। प्रायः नाश्ते और भोजन के समय भी सब एकत्र होते थे। सब लोग बड़े शांत स्वभाव के थे। यहाँ कोसी को कोई समस्या नहीं थी, किसी ने कोई समस्या की बाते नहीं की। आपस में भी सभी के बड़े आत्मीय संबंध थे
भाग - ६ - १४४/१४५
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