स्त्रीशक्ति

       " स्त्री " को  वस्तु  का  उपभोग  करने  से  अधिक  वस्तु  को  बाँटने  में  आनंद  आता  है । ग्रहण  करणे  की  क्षमता  स्त्री  में  अधिक  होती  है ।संगोपन  की  क्षमता  स्त्री  में  अधिक ।  होती  है । और  बाँटने  की  क्षमता  स्त्री  में  पुरुषों  की  अपेक्षा  अधिक  होती  है । ये  सब  स्त्रीसुलभ  विशेषताएँ  है । इसलिए  जब भी  कभी  आध्यात्मिक  क्रांति  इस जगत  में  आएगी , तो  उस  आध्यात्मिक  क्रांति  का  क्रियान्वय स्त्रीशक्ति से  ही  होगा । . . . .

ही.का.स.योग.- -[१]

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