आप जब ध्यान करते हो , तब

आप जब ध्यान करते हो , तब आपके सात पुश्तों की अच्छाईयाँ आपके भीतर प्रकट हो जाती हैं। सद्गुण अगली सात पीढ़ी तक सफर करते हैं। यानी आप केवल ध्यान नहीं कर रहे हो , आपकी आने वाली सात पिढियों तक भी यह गुण , यह संस्कार आप पहुँचा रहे हो। यानी आपकी अगली सात पीढ़ियों में भी कोई ध्यानमार्ग की ओर मुडेगा तो उसे भी आपके ज्ञान का लाभ होगा।
वर्तमान में मनुष्य का पिछली सात पिढियों और अगली सात पीढ़ियों से संबंध होता है। मनुष्य इन्हें जोड़ने का कार्य करता है। आप उनके बीच के पुल हो , यह याद रखो। आप भूतकाल और भविष्यकाल के पीढ़ियों के बीच का वर्तमान का पुल हो। लेकिन यह तब होगा , जब आप भी सदैव वर्तमान में रहोगे।

*आत्मेश्वर(आत्मा ही ईश्वर है।) पृष्ठ:७६*

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