*॥जय बाब स्वामी॥*

*श्री शिवकृपानंदजी की आरती की सूक्ष्मता का एहसास*

पूज्य गुरुदेव की आरती में ७ अन्तरे हैं जो हमारे ७चक्रों की शुद्धी करते हैं। हम चित्तशक्ति द्वारा बनाई गई पूज्य गुरुदेव की तस्वीर की आरती करते हैं। इसलिए हमारा ध्यान उनमें से बहती हुई वैश्विक चेतनाशक्ति पर जाता है और स्थूल शरीर के बजाय गुरु के माध्यम से बहती हुई शुद्ध  गुरुतत्वरुपी दैवीक शक्ति जो एक है , उसकी ही आराधना करते हैं।
भाव को अर्पण कर उनके प्रति जैसे हैं वैसे ही समर्पित हो जाते हैं। चूंकि गुरु का स्थूल शरीर साक्षात पंचमहाभूत देवों का शुद्ध स्वरूप है, इसलिए समर्पण करने से हमें गुरुकृपा प्राप्त होती है और हम पवित्र हो जाते हैं।

*मधुचैतन्य अक्टूबर ११*

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