*॥जय बाबा स्वामी॥*

"शिष्य की गुरु से आत्मीयता होनी चाहिये। आत्मीयता होगी श्रद्धा से।....आत्मीयता होने पर ही गुरु की बात उसी अर्थ में समझी जा सकती है , जिस अर्थ में गुरु बोल रहा है।"

*हिमालय का समर्पण योग १*

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