यह कहानी एक संदेश देती है कि बिना पवित्रता के आध्यात्मिक क्षेत्र में पहला कदम भी नहीं रखा जा सकता है। आज हमने इस आधार चक्र को जान । अब हम मैं एक पवित्र आत्मा हूँ , मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ तीन बार बोलकर ध्यान करेंगे। मैं बोलूँगा, बाद में आप बोलेंगे । बाद में , आप दस मिनिट अपने तालुभाग पर चित्त रखकर बैठेगे तो आप अनुभव करेंगे कि आपके भीतर यह जप स्वयं चलते ही रहेगा। ऐसा कहकर कुछ समय ध्यान भी कराया और बाद में कार्यक्रम समाप्त हो गया। ध्यान करने के बाद लोगों को उठते ही नहीं आ रहा था। सबको ध्यान के बाद अच्छा लगा। मैं भी बाद में सबसे मिला। हमारे में आपस में एक आत्मीय संबंध निर्माण हो रहा था । एक ही ध्यान पद्धति से जब आप ध्यान करते हैं तो ध्यान करने वालों में एक विशेष प्रकार का चैतन्य निर्माण हो जाता है और आपस में एक आत्मीय भाव निर्माण हो जाता है। ऐसा लग रहा था मानो , हम सालों से साथ में है
भाग 🌼 ६ 🌼 १९७

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