वसुधैव कुटुम्बकम
ऐसा कोई भी धर्म नहीं है जिसे पूरी दुनिया मानती है। "वसुधैव कुटुम्बकम" की धारणा में किसी धर्म को स्थान नहीं है। आप कोई भी जाति के हो, कोई भी धर्म के हो, कोई भी लिंग के हो,कोई भी भाषा के हों,कोई भी प्रान्त के हो इसके कोई मायने नहीं है।
धर्म याने ज्ञान,मेरा ज्ञान, मेरे अन्तर का ज्ञान। आपके अन्दर की अनुभूति समान है तो सब सीमाएं टूट जायेगी।
~ बाबा स्वामी
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